शोध से ही विकसित भारत का सपना होगा साकार : कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट
कुमाऊं विश्वविद्यालय में चार दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार एवं कार्यशाला शुरू, 195 शोधार्थियों ने लिया हिस्सा
नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के यूजीसी एमएमटीटीसी हर्मिटेज स्थित देवदार हॉल में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी), बेंगलुरु और कुमाऊं विश्वविद्यालय के एएनआरएफ पेयर प्रोजेक्ट के तहत चार दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार एवं कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। सेमिनार में देश के विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, उन्नत तकनीक और शोध में नवाचार की संभावनाओं पर मंथन किया। कार्यक्रम में करीब 195 शोधार्थियों ने भाग लिया।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने कहा कि शोधार्थियों को सबसे पहले सवाल पूछने की आदत विकसित करनी चाहिए। सवालों से जिज्ञासा पैदा होती है और यही जिज्ञासा बेहतर शोध की आधारशिला बनती है। उन्होंने कहा कि शोध के माध्यम से ही भारत विकसित भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।
उद्घाटन सत्र में प्रो. नंद गोपाल साहू ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि प्रो. गीता तिवारी ने सेमिनार की रूपरेखा प्रस्तुत की। आईआईएससी बेंगलुरु के प्रो. सत्यम श्रीवास ने कहा कि भारत को तकनीकी क्षेत्र में चीन जैसे देशों के समकक्ष पहुंचने के लिए उच्च स्तरीय शोध और स्वदेशी तकनीक विकसित करने पर जोर देना होगा।
मुख्य अतिथि एवं पूर्व कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत ने ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि कुमाऊं विश्वविद्यालय को एएनआरएफ पेयर प्रोजेक्ट मिलना विश्वविद्यालय में हो रहे उच्चस्तरीय शोध का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति का रास्ता गुणवत्तापूर्ण शोध से होकर गुजरता है।
निदेशक प्रो. संजय पंत ने कहा कि विकास के लिए आवश्यक नई तकनीक शोध के माध्यम से ही सामने आती है। उद्घाटन सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। अतिथियों को शॉल ओढ़ाकर, प्रतीक चिह्न एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर तथा उत्तराखंडी टोपी पहनाकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. महेंद्र राणा ने किया और धन्यवाद डॉ. संतोष उपाध्याय ने ज्ञापित किया।
विशेषज्ञों ने शोध की आधुनिक तकनीकों पर डाला प्रकाश
तकनीकी सत्र में प्रो. प्रवीण ने लिक्विड इलेक्ट्रो माइग्रेशन के क्षेत्र में अपने शोध एवं तकनीकी उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने क्रैक क्लोजर और मटेरियल हीलिंग से जुड़ी तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान में असफल प्रयोग भी भविष्य की बड़ी सफलताओं का आधार बन सकते हैं। उन्होंने शोधार्थियों से रचनात्मकता बनाए रखने और नए प्रयोग करने का आह्वान किया।
की-नोट स्पीकर एवं पेयर प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रो. सत्यम श्रीवास ने एक्स-रे डिफ्रेक्शन (XRD) के सिद्धांत और वैज्ञानिक अनुप्रयोगों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से पदार्थों की चरण संरचना, क्रिस्टल संरचना, लैटिस पैरामीटर, क्रिस्टल सममिति, क्रिस्टलाइट आकार, माइक्रोस्ट्रेन, अवशिष्ट तनाव और क्रिस्टल दोषों का अध्ययन किया जा सकता है। सत्र का संचालन प्रो. वीणा पांडे ने किया।
दूसरे तकनीकी सत्र में आईआईएससी के प्रो. भगवती प्रसाद ने एडवांस्ड मैटेरियल्स एंड डिवाइसेज फॉर नेक्स्ट जेनरेशन एआई विषय पर विचार रखे। उन्होंने अत्याधुनिक माइक्रोस्कोपी सुविधाओं और शोध उपकरणों की जानकारी देते हुए अल्ट्रा-लो-पावर मैग्नेटोइलेक्ट्रिक मेमोरी डिवाइसेज पर किए जा रहे शोध से प्रतिभागियों को अवगत कराया। उन्होंने अपने शोध से जुड़े पेटेंट और औद्योगिक अनुभव भी साझा किए।
कालीकट विश्वविद्यालय के प्रो. राजीव एस. मेनन ने सल्फोन्स की विशिष्टता एवं हेटरोसाइक्लिक संरचनाओं के निर्माण में उनके उपयोग पर व्याख्यान दिया। वहीं डॉ. पूनम बेंजवाल ने सेमीकंडक्टर एवं चिप निर्माण विषय पर जानकारी देते हुए आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में माइक्रोचिप और सेमीकंडक्टर तकनीक की भूमिका समझाई। द्वितीय तकनीकी सत्र का संचालन प्रो. ललित तिवारी ने किया।
सेमिनार में डॉ. अर्चना सह नेगी, डॉ. महेश चंद्र आर्या, डॉ. पेनी जोशी, डॉ. दीपशिखा जोशी, डॉ. गिरीश चंद्र खरकवाल, डॉ. आंचल अनेजा, डॉ. मोहित रौतेला, डॉ. दीपक मेलकानी सहित शिक्षक, शोधार्थी एवं प्रतिभागी मौजूद रहे।
सेमिनार के तीसरे दिन शोधार्थियों को प्रयोगशालाओं में विभिन्न अत्याधुनिक उपकरणों की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जाएगी, जबकि दूसरे दिन विशेषज्ञों के महत्वपूर्ण व्याख्यान और तकनीकी सत्र आयोजित होंगे।






