कैला खान में गूंजे मां महागौरी के जयकारे, विधि-विधान से हुई अष्टम स्वरूप की पूजा
नैनीताल। छावनी परिषद नैनीताल के कैला खान में आयोजित नौ दिवसीय दुर्गा पूजा महोत्सव में रविवार को मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी के सानिध्य में छावनी परिषद के फार्मेसिस्ट पं. प्रकाश चंद्र कांडपाल ने सपत्नीक स्वस्तिवाचन, षोडशोपचार गणेश पूजन और दुर्गा सप्तशती के पाठ के साथ पूजा संपन्न कराई।
पूजा-अर्चना के दौरान श्रद्धालुओं ने मां महागौरी के जयकारे लगाए और सुख-समृद्धि एवं परिवार की खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम में छावनी परिषद के अजीत कुमार, राजेंद्र सिंह बोरा, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापिका आरती कपिल, गर्विता कांडपाल समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी ने मां महागौरी की महिमा बताते हुए कहा कि नवरात्रि के आठवें दिन मां के इस स्वरूप की पूजा की जाती है। मां का स्वरूप शंख, चंद्रमा और कुंद के फूल के समान गौर वर्ण का माना गया है। उनके वस्त्र और आभूषण भी सफेद हैं, इसलिए उन्हें श्वेतांबरधरा कहा जाता है। वृषभ पर सवार होने के कारण मां को वृषारूढ़ा भी कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए मां महागौरी ने कठोर तपस्या की थी। तपस्या के कारण उनका शरीर काला पड़ गया था। मां की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने गंगा के पवित्र जल से उनके शरीर को धोया, जिसके बाद उनका स्वरूप अत्यंत गौर और कांतिमय हो गया। इसी कारण उनका नाम महागौरी पड़ा।
मान्यता है कि मां महागौरी की पूजा-अर्चना से भक्तों के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि आती है। मां की आराधना को कल्याणकारी और फलदायी माना गया है।
नौ दिवसीय यह दुर्गा पूजा महोत्सव छावनी परिषद की मुख्य अधिशासी अधिकारी तनु जाट के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है।



















