
पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण और पहाड़ के मीडिया विमर्श पर हुई सारगर्भित चर्चा, युवा रैपर्स की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
अल्मोड़ा, 2 नवंबर। साहित्य, संस्कृति, पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों को समर्पित तीन दिवसीय अल्मोड़ा लिटरेचर फेस्टिवल का रविवार को भव्य समापन हो गया। महोत्सव के अंतिम दिन पर्यावरण संरक्षण, उत्तराखंड के विकास मॉडल, बढ़ते पर्यटन के दुष्प्रभाव, महिला विमर्श और पहाड़ में मीडिया की भूमिका जैसे ज्वलंत विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। वहीं युवा गायकों और रैपर्स की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन में चार चांद लगा दिए।
विकास मॉडल और ओवर-टूरिज्म पर जताई चिंता
महोत्सव के महत्वपूर्ण सत्र में पर्यावरणविद् ‘पीपल बाबा’ और रोमोला बुटालिया ने उत्तराखंड के मौजूदा विकास मॉडल और पर्यावरणीय चुनौतियों पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि विकास की वर्तमान अवधारणा में स्थानीय लोगों के सरोकारों और हितों को पर्याप्त स्थान नहीं मिल पा रहा है। संसाधनों के लगातार दोहन पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि गढ़वाल क्षेत्र पहले ही ओवर-टूरिज्म की गंभीर समस्या से जूझ रहा है और अब कुमाऊं में भी इसके संकेत दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने समय रहते पर्यटन को व्यवस्थित करने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
महिला विमर्श में परंपरा और बदलाव पर चर्चा
31 अक्टूबर को आयोजित ‘वीमेन एट क्रॉसरोड्स : ट्रेडिशन, ट्रांसफॉर्मेशन एंड टुमारो’ सत्र में महिलाओं की बदलती भूमिका, परंपराओं और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा हुई। तनुजा बहुगुणा के संचालन में इशिता चौहान और डॉ. मीता उपाध्याय ने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में महिलाओं की सोच और जरूरतों के अनुरूप परंपराओं को नए सिरे से परिभाषित करना जरूरी है। चर्चा में युवा पीढ़ी की महिलाओं की सार्वजनिक जीवन में भागीदारी और उनके सामने मौजूद चुनौतियों को भी प्रमुखता से उठाया गया। इस दौरान प्रसिद्ध नारीवादी विचारक ग्लोरिया स्टाइनम के विचारों का भी उल्लेख किया गया।
पहाड़ के विकास का एजेंडा स्थानीय लोग तय करें : राहुल कोटियाल
‘खबर, नजर और नजरिया’ सत्र में वरिष्ठ पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म बारामासा के संस्थापक राहुल कोटियाल ने आशुतोष पंत के साथ संवाद किया। उन्होंने कहा कि पहाड़ के विकास का एजेंडा और उसकी दिशा स्थानीय लोगों को ही तय करनी चाहिए। विकास से जुड़े विमर्श में बाहरी एजेंसियों के बजाय स्थानीय निवासियों की भागीदारी और उनकी आवाज को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय समाज जितना जागरूक होगा, मीडिया भी उतनी ही प्रभावी भूमिका निभा सकेगा।
युवा रैपर्स की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को झुमाया
साहित्यिक और वैचारिक सत्रों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहे। रात्रिकालीन कार्यक्रमों में युवा गायक एवं रैपर तरुण बिष्ट (टैक्स्रन बिष्ट) और रोहन पंगती ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। युवाओं ने भी बड़ी संख्या में कार्यक्रमों में भागीदारी कर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
विनायक पंत ने सहयोगियों और पूरी टीम का जताया आभार
समापन सत्र में फेस्टिवल के संयोजक विनायक पंत ने आयोजन की सफलता के लिए सभी सहयोगियों, प्रायोजकों, कोर टीम और वॉलिंटियर्स का आभार व्यक्त किया। उन्होंने टाइटल स्पॉन्सर ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी सहित सभी प्रायोजकों के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने आयोजन की अध्यक्ष डॉ. वसुधा पंत, डॉ. दीपा गुप्ता, मनोज गुप्ता, रचित पंत, मीनाक्षी पाठक, दीपक जोशी, दिलीप, मनीषा पंत, तनुजा बहुगुणा, भूषण पांडे और गुंजिता पंत सहित पूरी कोर टीम के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि सभी सदस्यों और वॉलिंटियर्स की मेहनत, समर्पण और सामूहिक प्रयासों से यह आयोजन सफल हो सका।
तीन दिनों तक चले इस साहित्यिक महोत्सव ने अल्मोड़ा को साहित्य, संस्कृति, पर्यावरण और सामाजिक विमर्श का महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।



















