
नैनीताल। बुजुर्ग किसी भी समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं। उनके अनुभव, संस्कार और जीवन से मिली सीख नई पीढ़ी को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी भावना को केंद्र में रखते हुए लेक सिटी वेलफेयर क्लब की ओर से रॉयल होटल में ‘हमारी संस्कृति, हमारी पहचान’ अभियान के तहत ‘बुजुर्ग हमारी धरोहर’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद दिनेश आर्य मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विधायक सरिता आर्य के साथ दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर 12 बुजुर्गों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने के साथ ही समाज में उनके योगदान और अनुभवों के महत्व को सामने लाना रहा। आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आधुनिकता के दौर में आगे बढ़ने के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों, पारंपरिक मूल्यों और सामाजिक संस्कारों को सहेजकर रखना भी जरूरी है। बुजुर्गों का सम्मान हमारी परंपरा का अभिन्न हिस्सा है और उनके अनुभव आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक हैं।
लेक सिटी वेलफेयर क्लब की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में संस्कृति और सामाजिक सरोकारों को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया। ‘हमारी संस्कृति, हमारी पहचान’ अभियान के माध्यम से स्थानीय परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने तथा उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
कार्यक्रम का संचालन क्लब की सचिव प्रगति जैन ने किया। इस अवसर पर हेम आर्य, अंबा आर्य, नितिन कार्की और अरविंद पड़ियार सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
13 दिसंबर को जिमखाना में होगा विशेष आयोजन
लेक सिटी वेलफेयर क्लब के संतोष साह ने बताया कि आगामी 13 दिसंबर को जिमखाना में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें क्षेत्र की पारंपरिक संस्कृति और स्थानीय पहचान को प्रमुखता दी जाएगी। कार्यक्रम के अंतर्गत स्थानीय खानपान, ऐपण कला और विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इन गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के साथ ही कुमाऊं की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि क्लब का उद्देश्य सामाजिक सहभागिता बढ़ाने, बुजुर्गों को सम्मान देने और पारंपरिक संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास करना है। ऐसे आयोजनों से समाज में आपसी जुड़ाव मजबूत होने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक पहचान समझने और उसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है।



















