लोअर मॉल रोड सिर्फ सड़क नहीं… नैनीताल की धड़कन है, इसे बचाने पुनीत टंडन क्यों बैठे धरने पर?लोअर मॉल रोड सिर्फ एक सड़क नहीं है।
यह नैनीताल की पहचान है।
यह यहां के व्यापार की धुरी है।
यह पर्यटन की राह है।
यह हजारों लोगों की उम्मीद है।
यह हमारी यादों का रास्ता है।
और सबसे बढ़कर—
यह नैनीताल की धड़कन है।
नैनीताल की खूबसूरती को निहारने वाला शायद ही कोई ऐसा शख्स होगा, जिसने झील के किनारे से गुजरती लोअर मॉल रोड को महसूस न किया हो। यह सिर्फ डामर और पत्थरों से बनी सड़क नहीं है। इसके साथ नैनीताल की यादें, रोज़गार, पर्यटन, व्यापार और शहर की रोजमर्रा की जिंदगी जुड़ी हुई है।
किसी ने इसी सड़क से गुजरते हुए पहली बार नैनीताल की झील देखी होगी। किसी ने परिवार के साथ यहीं तस्वीर खिंचवाई होगी। किसी दुकानदार ने इसी सड़क के सहारे अपने बच्चों का भविष्य संवारा होगा। किसी पर्यटक ने इसी रास्ते से गुजरते हुए पहाड़ों की खूबसूरती को अपने दिल में उतारा होगा।
इसलिए लोअर मॉल रोड की परेशानी सिर्फ एक सड़क की परेशानी नहीं है। यह नैनीताल के वर्तमान और भविष्य से जुड़ा सवाल है।
और इसी सवाल को लेकर माँ नयना देवी नैनीताल व्यापार मंडल अध्यक्ष पुनीत टंडन धरने पर बैठे हैं।
आखिर धरने की नौबत क्यों आई?
लोअर मॉल रोड के निर्माण और ट्रीटमेंट कार्य को लेकर 15 अगस्त तक काम पूरा करने की डेडलाइन तय की गई थी। नैनीतालवासियों को उम्मीद थी कि स्वतंत्रता दिवस तक उन्हें इस महत्वपूर्ण सड़क को लेकर बड़ी राहत मिलेगी।
लेकिन 15 अगस्त गुजर गया और काम तय समयसीमा में पूरा नहीं हो सका।
लंबे समय से सड़क की समस्या को लेकर आवाज उठा रहे पुनीत टंडन ने आखिरकार धरने पर बैठने का फैसला लिया।
यह फैसला किसी व्यक्तिगत स्वार्थ या राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि उनके अनुसार नैनीताल के हित और भविष्य को लेकर चिंता का परिणाम है।
पुनीत टंडन का कहना है कि जब एक महत्वपूर्ण समयसीमा तय की गई थी और उसके बावजूद काम पूरा नहीं हुआ, तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि देरी क्यों हुई और अब सड़क कब तक पूरी होगी।
“यह आंदोलन मेरा नहीं, नैनीताल का है”
पुनीत टंडन इस आंदोलन को व्यक्तिगत लड़ाई नहीं मानते।
उनका कहना है—
“यह आंदोलन मेरा नहीं है। यह नैनीताल के भविष्य का आंदोलन है। यह नैनीताल की शान और पहचान को बचाने की लड़ाई है।”
इन शब्दों में एक व्यापारी की नाराजगी से कहीं ज्यादा अपने शहर के लिए चिंता दिखाई देती है।
क्योंकि लोअर मॉल रोड से सिर्फ वाहन नहीं गुजरते। यहां से लोगों की रोजी-रोटी गुजरती है। पर्यटकों की आवाजाही जुड़ी है। शहर की यातायात व्यवस्था जुड़ी है और नैनीताल की पर्यटन अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा इससे प्रभावित होता है।
एक सड़क बंद होती है तो पूरा शहर प्रभावित होता है
लोअर मॉल रोड लंबे समय से बंद है। इसका असर व्यापारियों से लेकर स्थानीय लोगों और पर्यटकों तक दिखाई दे रहा है।
दुकानदार ग्राहकों की राह देखते हैं।
स्थानीय लोग वैकल्पिक रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं।
पर्यटकों को आवाजाही में परेशानी होती है।
और शहर की यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
नैनीताल जैसे पर्यटन शहर के लिए यह स्थिति सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि शहर की छवि और भविष्य से जुड़ी चिंता भी है।
आखिर जब नैनीताल की पहचान ही पर्यटन है, तो उसकी प्रमुख सड़क लंबे समय तक बंद क्यों रहे?
धरना क्यों, आखिर मजबूरी क्या थी?
किसी व्यापारी नेता का सड़क पर बैठकर धरना देना कोई छोटी बात नहीं होती।
धरने के पीछे अक्सर कई दिनों, कई महीनों की उम्मीदें, सवाल और इंतजार छिपे होते हैं।
जब समस्या बताई जाए, मांग उठाई जाए, समयसीमा तय हो और फिर भी काम पूरा न हो, तो आवाज को और बुलंद करने के लिए धरने का रास्ता अपनाना पड़ता है।
पुनीत टंडन का धरना भी इसी पीड़ा की आवाज है।
यह आमरण अनशन नहीं, बल्कि अन्न त्याग के साथ चल रहा धरना आंदोलन है। इसका उद्देश्य शासन-प्रशासन तक नैनीताल की इस गंभीर समस्या की आवाज पहुंचाना और लोअर मॉल रोड के काम में तेजी लाना है।
यह लड़ाई किसी के खिलाफ नहीं, नैनीताल के लिए है
पुनीत टंडन का कहना है कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति, अधिकारी या सरकार के खिलाफ व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है।
उनकी चिंता यह है कि नैनीताल की शान बनी लोअर मॉल रोड मजबूत, सुरक्षित और जल्द तैयार हो।
उनका सवाल सीधा है—
जब काम पूरा करने की तारीख तय थी, तो काम पूरा क्यों नहीं हुआ?
जनता को यह जानने का अधिकार है कि देरी का कारण क्या है, निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति क्या है और अब नई समयसीमा क्या होगी।
नैनीतालवासियों, यह सवाल आपका भी है
आज पुनीत टंडन अकेले धरने पर बैठे हैं, लेकिन उनके पीछे खड़े सवाल नैनीताल के हजारों लोगों के हैं।
यह उस व्यापारी का सवाल है जिसकी दुकान सड़क की आवाजाही पर निर्भर है।
यह उस स्थानीय परिवार का सवाल है जो नैनीताल की अर्थव्यवस्था से अपनी रोजी-रोटी चलाता है।
यह उस नागरिक का सवाल है जो रोज इस सड़क की परेशानी देखता है।
और यह उस पर्यटक का सवाल है जो नैनीताल को सिर्फ खूबसूरत झील और पहाड़ों के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित और सुरक्षित शहर के रूप में देखना चाहता है।
इसलिए इस धरने को सिर्फ पुनीत टंडन का धरना समझना शायद इस पूरे मुद्दे की गंभीरता को छोटा कर देना होगा।
यह एक आवाज है—
जो कह रही है कि नैनीताल को अब इंतजार नहीं चाहिए।
यह एक सवाल है—
जो पूछ रहा है कि काम कब पूरा होगा?
यह एक उम्मीद है—
कि लोअर मॉल रोड फिर से उसी रफ्तार से सांस लेगी।
लोअर मॉल रोड को चाहिए समाधान, सियासत नहीं
नैनीताल को किसी विवाद की नहीं, समाधान की जरूरत है।
व्यापारियों को अपना कारोबार चाहिए।
स्थानीय लोगों को सुचारु यातायात चाहिए।
पर्यटकों को बेहतर सुविधा चाहिए।
और नैनीताल को अपनी मजबूत और सुरक्षित लोअर मॉल रोड चाहिए।
शासन-प्रशासन को चाहिए कि इस आंदोलन को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के साथ तत्काल स्थिति स्पष्ट करे और जनता को बताए कि लोअर मॉल रोड का काम अब कब तक पूरा होगा।
क्योंकि सड़क सिर्फ बनाई नहीं जाती, उसके साथ लोगों की उम्मीदें भी बनती हैं।
लोअर मॉल रोड के साथ नैनीताल की हजारों यादें जुड़ी हैं।
हजारों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी है।
नैनीताल का पर्यटन जुड़ा है।
और आने वाले कल का नैनीताल भी जुड़ा है।
पुनीत टंडन के शब्दों में—
“यह आंदोलन मेरा नहीं, नैनीताल का है। यह नैनीताल के भविष्य की लड़ाई है। यह नैनीताल की शान और पहचान की लड़ाई है।”
और शायद यही इस पूरे आंदोलन का सबसे बड़ा संदेश है—
लोअर मॉल रोड सिर्फ एक सड़क नहीं है।
यह नैनीताल की पहचान है।
यह यहां के व्यापार की धुरी है।
यह पर्यटन की राह है।
यह हजारों लोगों की उम्मीद है।
यह हमारी यादों का रास्ता है।
और सबसे बढ़कर—
यह नैनीताल की धड़कन है।
इस धड़कन को अब आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए।
नैनीताल को अब तारीख नहीं, काम पूरा होने की खबर चाहिए।
क्योंकि शहर की सड़कें सिर्फ पत्थरों और डामर से नहीं बनतीं…
उनमें शहर के लोगों का भविष्य जुड़ा होता है।
