
नैनीताल। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह व्रत 22 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और व्रत करने से पापों से मुक्ति मिलती है तथा अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी के अनुसार, 22 अक्टूबर को एकादशी तिथि दोपहर 2 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। शतभिषा नक्षत्र शाम 8 बजकर 49 मिनट तक रहेगा, जबकि वृद्धि योग रात 11 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। इस दिन चंद्रमा कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे।
पापों से मुक्ति दिलाने वाला है व्रत
पापांकुशा एकादशी का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत का महत्व बताते हुए कहा था कि आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं और उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन क्षीरसागर में शेषनाग पर शयन करने वाले भगवान विष्णु की पूजा और वंदना करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
बहेलिए को मिला पापों से मुक्ति का मार्ग
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में विंध्य पर्वत पर क्रोधन नाम का एक बहेलिया रहता था। उसका जीवन हिंसा, लूटपाट, मद्यपान और अन्य पापकर्मों में बीता। जब उसके जीवन का अंतिम समय निकट आया, तो यमदूतों ने उसे अगले दिन लेने आने की बात कही। यह सुनकर वह भयभीत हो गया और महर्षि अंगिरा के आश्रम पहुंचकर अपने पापों से मुक्ति का उपाय पूछने लगा।
बहेलिए की प्रार्थना सुनकर महर्षि अंगिरा ने उसे पापांकुशा एकादशी का विधि-विधान से व्रत करने की सलाह दी। ऋषि के बताए अनुसार व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से उसे पापों से मुक्ति मिली तथा भगवान की कृपा से विष्णुलोक की प्राप्ति हुई। मान्यता है कि इसके बाद यमदूत उसे लेने के बजाय यमलोक लौट गए।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, पापांकुशा एकादशी का व्रत श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान विष्णु का पूजन, मंत्र-जप और दान-पुण्य करते हैं।
आलेख: ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी



















