नैनीताल शिक्षा

74 साल की उम्र में भी लोकसंस्कृति के संवाहक बने मदन राम, सैनिक स्कूल में बच्चों को सिखा रहे कुमाऊंनी लोककला हुड़के और मस्कबीन की मधुर धुनों से नई पीढ़ी को जोड़ रहे लोक कलाकार, बच्छी राम भी दे रहे साथ

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74 साल की उम्र में भी लोकसंस्कृति के संवाहक बने मदन राम, सैनिक स्कूल में बच्चों को सिखा रहे कुमाऊंनी लोककला  हुड़के और मस्कबीन की मधुर धुनों से नई पीढ़ी को जोड़ रहे लोक कलाकार, बच्छी राम भी दे रहे साथ

नैनीताल। उम्र के 74 पड़ाव पार करने के बाद भी लोककला के प्रति जुनून और अपनी संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का जज्बा कम नहीं हुआ है। सात नंबर क्षेत्र निवासी लोक कलाकार मदन राम सैनिक स्कूल में अपने हुनर के माध्यम से बच्चों को कुमाऊंनी लोकसंगीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की शिक्षा दे रहे हैं। उनका प्रयास केवल संगीत सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी लोकसंस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना भी है।

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मदन राम पूर्व में होटल में हेड कुक के रूप में कार्यरत रहे हैं। होटल में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के साथ ही उनके मन में लोकसंगीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के प्रति गहरा लगाव रहा। अब वह सैनिक स्कूल में बच्चों को अपने अनुभव और हुनर से कुमाऊंनी लोककला की बारीकियां सिखा रहे हैं। 74 वर्ष की उम्र में उनका यह समर्पण उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है, जो अपनी पारंपरिक कलाओं को जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं।

इस सांस्कृतिक पहल में उनके साथी बच्छी राम (34 वर्ष) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वह हुड़के की थाप के साथ मदन राम का सहयोग करते हैं। दोनों कलाकारों की जुगलबंदी से कुमाऊंनी लोकसंगीत की पारंपरिक छटा जीवंत हो उठती है।

मस्कबीन की धुन में छिपी है पहाड़ की पहचान

कुमाऊंनी लोकसंगीत में हुड़के के साथ मस्कबीन का भी विशेष महत्व है। मस्कबीन एक पारंपरिक फूंक से बजाया जाने वाला वाद्ययंत्र है, जिसकी मधुर और गूंजती हुई धुन लोकगीतों एवं पारंपरिक प्रस्तुतियों को विशेष पहचान देती है। इसकी धुन पहाड़ की सांस्कृतिक परंपराओं और लोकजीवन की याद दिलाती है। मस्कबीन की निरंतर स्वरधारा और हुड़के की लयबद्ध थाप का मेल लोकसंगीत को और भी आकर्षक बना देता है।

मदन राम और बच्छी राम का प्रयास इस मायने में महत्वपूर्ण है कि आज के आधुनिक दौर में जहां नई पीढ़ी का रुझान आधुनिक संगीत की ओर बढ़ रहा है, वहीं ये कलाकार बच्चों को अपनी जड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों से जोड़ने का काम कर रहे हैं।

सैनिक स्कूल में बच्चों को लोककला का प्रशिक्षण देकर मदन राम अपनी कला को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की एक सराहनीय पहल कर रहे हैं। उनका यह प्रयास संदेश देता है कि लोकसंस्कृति केवल मंचों और आयोजनों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे सीखने, सिखाने और जीवन में अपनाने की जरूरत है।

लोक कलाकारों का यही समर्पण पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रखने में अहम भूमिका निभा रहा है।

संपर्क: 9759900936

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