
बिल्कुल। इसे सामान्य खबर की बजाय रामलीला की परंपरा, पर्दे के पीछे के कलाकारों और उनके दशकों के योगदान को उभारते हुए विस्तृत फीचर के रूप में बनाया है।
मंच पर दिखते हैं राम-रावण, पर्दे के पीछे वर्षों की साधना से जीवंत होते हैं पात्र
1918 से चली आ रही नैनीताल की रामलीला परंपरा में 47 वर्षों से मेकअप की जिम्मेदारी संभाल रहे भीम सिंह कार्की, तीन दशक से अधिक समय से रावण का किरदार निभा रहे कैलाश जोशी
नैनीताल। नैनीताल की रामलीला केवल मंच पर होने वाला अभिनय नहीं, बल्कि इसके पीछे वर्षों की मेहनत, अनुभव और परंपरा से जुड़ी कलाकारों की एक पूरी दुनिया है। श्री राम सेवक सभा नैनीताल वर्ष 1918 से शहर में रामलीला का मंचन करती आ रही है। 100 से अधिक वर्षों की इस यात्रा में अनेक कलाकारों ने अलग-अलग पात्रों को अपनी प्रतिभा से जीवंत किया और रामलीला की परंपरा को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाया।
मंच पर जब भगवान राम, लक्ष्मण, सीता, रावण, केवट अथवा अन्य पात्र दर्शकों के सामने आते हैं तो उनकी वेशभूषा, चेहरे का रूप, मुकुट और मेकअप सबसे पहले दर्शकों का ध्यान आकर्षित करते हैं। लेकिन इस रूप को तैयार करने के पीछे भी कई घंटों की मेहनत होती है। इसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को पिछले 47 वर्षों से भीम सिंह कार्की निभाते आ रहे हैं।
1979 से मेकअप की जिम्मेदारी
भीम सिंह कार्की वर्ष 1979 से रामलीला के कलाकारों का मेकअप करते आ रहे हैं। लगभग पांच दशक के अनुभव में उन्होंने रामलीला के अलग-अलग पात्रों को करीब से देखा और उनके स्वरूप को मंच के अनुरूप तैयार किया है। किसी कलाकार को भगवान राम का रूप देना हो, किसी को राक्षस का स्वरूप देना हो या फिर किसी अन्य पात्र के व्यक्तित्व को उभारना हो, कार्की अपने अनुभव के आधार पर कलाकार के चेहरे और पात्र के चरित्र के बीच सामंजस्य बैठाने का प्रयास करते हैं।
रामलीला में मेकअप केवल चेहरे पर रंग लगाने तक सीमित नहीं है। पात्र की उम्र, उसके स्वभाव, भूमिका और मंच पर उसकी प्रस्तुति को ध्यान में रखते हुए मेकअप किया जाता है। यही वजह है कि एक सामान्य कलाकार जब मेकअप और वेशभूषा के बाद मंच पर पहुंचता है तो दर्शकों को उसमें पूरी तरह अलग पात्र नजर आता है।
मेकअप के साथ केवट की भूमिका भी निभाते हैं
भीम सिंह कार्की की खासियत यह भी है कि वह केवल पर्दे के पीछे रहकर कलाकारों को तैयार नहीं करते, बल्कि स्वयं भी रामलीला के मंच से जुड़े हुए हैं। वह केवट की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस तरह उनका रामलीला से रिश्ता मेकअप कलाकार और अभिनेता दोनों के रूप में बना हुआ है।
मंच पर अभिनय का अनुभव होने के कारण उन्हें यह समझने में भी मदद मिलती है कि किसी पात्र को किस तरह का मेकअप और रूप दिया जाए, ताकि मंच की रोशनी और दर्शकों की दूरी से भी उसका चरित्र प्रभावी दिखाई दे।
रावण के किरदार में तीन दशक से कैलाश जोशी
नैनीताल की रामलीला में कैलाश जोशी का नाम रावण के किरदार के साथ लंबे समय से जुड़ा हुआ है। वह 30 वर्ष से अधिक समय से रावण का अभिनय करते आ रहे हैं। उनके संवाद बोलने का अंदाज, आवाज की गंभीरता और अभिनय शैली रावण के पात्र को प्रभावशाली बनाती है।
रावण का किरदार निभाना केवल भारी-भरकम संवाद बोलने तक सीमित नहीं है। उसके व्यक्तित्व में अहंकार, शक्ति, क्रोध और संवादों की प्रभावशाली प्रस्तुति का संतुलन जरूरी होता है। कैलाश जोशी वर्षों के अनुभव के साथ इस किरदार को मंच पर अपनी शैली में प्रस्तुत करते आ रहे हैं।
उनकी आवाज रामलीला के दौरान पात्र में विशेष रोचकता पैदा करती है। जब वह रावण के रूप में मंच पर संवाद बोलते हैं तो उनकी आवाज और अभिनय दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचता है।
कलाकारों के रूप को निखारने में कैलाश जोशी की भी भूमिका
कैलाश जोशी केवल रावण का अभिनय ही नहीं करते, बल्कि कलाकारों के मेकअप में भी सहयोग करते हैं। इस तरह मंच पर दिखाई देने वाले पात्रों को तैयार करने में उनकी भूमिका पर्दे के पीछे भी बनी रहती है।
रामलीला की सफलता में मंच पर अभिनय करने वाले कलाकारों के साथ-साथ उन लोगों का योगदान भी महत्वपूर्ण है, जो मंच के पीछे रहकर कलाकारों को तैयार करते हैं, संवाद और प्रस्तुति में सहयोग करते हैं तथा पूरे आयोजन को व्यवस्थित रूप देने में जुटे रहते हैं।
बिमल चौधरी संभालते हैं प्रबंधन की जिम्मेदारी
रामलीला के आयोजन में प्रबंधक बिमल चौधरी की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। कलाकारों, मंचन और आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं के बीच समन्वय बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं होता। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने में प्रबंधन से जुड़े लोगों की भूमिका अहम रहती है।
पीढ़ियों को जोड़ रही नैनीताल की रामलीला
श्री राम सेवक सभा की रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पुरानी परंपरा के साथ कलाकारों की निरंतर भागीदारी है। एक ओर नई पीढ़ी के कलाकार मंच पर अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं तो दूसरी ओर दशकों से जुड़े वरिष्ठ कलाकार अपने अनुभव से इस परंपरा को मजबूती दे रहे हैं।
भीम सिंह कार्की के 47 वर्षों के अनुभव और कैलाश जोशी के तीन दशक से अधिक लंबे रावण अभिनय से यह स्पष्ट होता है कि नैनीताल की रामलीला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि कलाकारों की वर्षों की साधना और समर्पण की कहानी भी है।
मंच पर जब कोई पात्र दर्शकों के सामने जीवंत होता है तो उसके पीछे कलाकार का अभिनय, संवाद, आवाज, मेकअप, वेशभूषा और मंच के पीछे काम करने वाले अनेक लोगों की मेहनत शामिल होती है। यही सामूहिक प्रयास नैनीताल की रामलीला को आज भी जीवंत बनाए हुए है और 1918 से चली आ रही इसकी परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहा है।



















