नैनीताल

कोजागिरी पूर्णिमा पर करें महालक्ष्मी यंत्र की स्थापना, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

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कोजागिरी पूर्णिमा पर करें महालक्ष्मी यंत्र की स्थापना, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

नैनीताल। शरद पूर्णिमा यानी कोजागिरी पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की आराधना, चंद्र पूजा और रात्रि जागरण का विशेष महत्व माना जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी, गेठिया (नैनीताल) के अनुसार, इस दिन महालक्ष्मी यंत्र (श्री यंत्र) की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।

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इस वर्ष कोजागिरी पूर्णिमा 25 अक्टूबर, रविवार को मनाई जाएगी। दी गई पंचांग गणना के अनुसार, पूर्णिमा तिथि सुबह 11:56 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे तक रहेगी। चंद्रोदय शाम लगभग पांच बजे होने का अनुमान है। निशिता काल में पूजा का शुभ समय रात 11:40 बजे से 12:31 बजे तक बताया गया है।

कौन जाग रहा है, इसी भाव से जुड़ा है कोजागिरी नाम

पंडित प्रकाश जोशी के अनुसार, कोजागिरी का अर्थ है—‘कौन जाग रहा है?’ धार्मिक मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जागरण करने वाले भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। इसी कारण इस पर्व पर रात्रि जागरण का विशेष महत्व माना जाता है। इसे कौमुदी व्रत भी कहा जाता है।

शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा भी प्रचलित है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें अमृततुल्य होती हैं। धार्मिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इसी रात महारास रचाया था।

ऐसे करें महालक्ष्मी यंत्र की स्थापना

कोजागिरी पूर्णिमा पर पूजा स्थल की साफ-सफाई कर चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं। महालक्ष्मी यंत्र को गंगाजल और पंचामृत से शुद्ध कर स्थापित करें। इसके बाद मां लक्ष्मी का ध्यान करते हुए ‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं नमः’ मंत्र का जाप करें। पुष्प, दीप, धूप और नैवेद्य अर्पित कर परिवार की सुख-शांति, धन-धान्य और समृद्धि की कामना करें।

व्रत कथा भी है प्रचलित

कोजागिरी पूर्णिमा से जुड़ी प्रचलित कथा में एक साहूकार की दो पुत्रियों का उल्लेख मिलता है। दोनों पूर्णिमा का व्रत रखती थीं, लेकिन छोटी पुत्री अधूरा व्रत करती थी। बाद में पंडितों की सलाह पर उसने विधिपूर्वक व्रत किया। कथा के अनुसार, इसके बाद उसके मृत माने जा रहे पुत्र के जीवित होने की घटना को बड़ी बहन के पुण्य से जोड़कर देखा गया। इस कथा के माध्यम से पूर्णिमा व्रत की धार्मिक महत्ता बताई जाती है।

चंद्र पूजा के मंत्र

इस अवसर पर श्रद्धालु ‘ॐ सों सोमाय नमः’ और ‘ॐ श्रीं श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः’ सहित प्रचलित चंद्र मंत्रों का जाप कर सकते हैं। पंडित प्रकाश जोशी ने शरद पूर्णिमा एवं कोजागिरी पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

— ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी, गेठिया, नैनीताल के अनुसार।

 

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