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आस्था का सैलाब, जयकारों से गूंजा नैनीताल; पुष्पवर्षा से हुआ नंदा-सुनंदा डोले का भव्य स्वागत

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नैनीताल। मां नंदा-सुनंदा के डोले के नगर भ्रमण के दौरान बुधवार को नैनीताल पूरी तरह आस्था के रंग में रंगा नजर आया। हल्की बारिश के बीच भी हजारों श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। जगह-जगह श्रद्धालु मां नंदा-सुनंदा के दर्शन के लिए उमड़े और डोले के साथ चलते हुए जयकारों से पूरा शहर गूंजता रहा।

नयना देवी मंदिर परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद मां नंदा-सुनंदा का डोला नगर भ्रमण के लिए रवाना हुआ। मंदिर के मुख्य द्वार पर श्रद्धालुओं ने डोले पर पुष्पवर्षा कर मां का भव्य स्वागत किया। इसके बाद डोला  डीएसए  मैदान, मस्जिद,शारदा संघ से माल रोड  से तल्लीताल की तरफ़ आस्था का सैलाब, जयकारों से गूंजा नैनीताल; पुष्पवर्षा से हुआ नंदा-सुनंदा डोले का भव्य स्वागत आस्था का सैलाब, जयकारों से गूंजा नैनीताल; पुष्पवर्षा से हुआ नंदा-सुनंदा डोले का भव्य स्वागत आस्था का सैलाब, जयकारों से गूंजा नैनीताल; पुष्पवर्षा से हुआ नंदा-सुनंदा डोले का भव्य स्वागतआगे बढ़ा। रास्ते में दोनों ओर खड़े श्रद्धालु हाथ जोड़कर मां के दर्शन करते नजर आए।

नगर भ्रमण के दौरान हल्की बारिश होती रही, लेकिन श्रद्धालुओं के कदम नहीं रुके। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग   डोले के साथ चलते रहे। जगह-जगह स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने डोले का स्वागत किया। मां नंदा-सुनंदा के जयकारों से नैनीताल की वादियां भक्तिमय हो उठीं।

जगह-जगह भंडारे, हलवा-पूरी, पानी और फ्रूटी की व्यवस्था

डोले के नगर भ्रमण के दौरान श्रद्धालुओं की सेवा के लिए जगह-जगह भंडारे लगाए गए। विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं को हलवा-पूरी, पानी, फ्रूटी और प्रसाद वितरित किया गया। स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों ने पूरे उत्साह के साथ श्रद्धालुओं की सेवा की। बारिश के बावजूद सेवा कार्य लगातार जारी रहा।

डोले के साथ ढोल-दमाऊं, बैंड-बाजे और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों ने माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया। पारंपरिक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। श्रद्धालु मां नंदा-सुनंदा के दर्शन कर आशीर्वाद लेते रहे।

नैनीताल की सड़कों पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब

डोले के नगर भ्रमण ने नैनीताल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा की जीवंत तस्वीर पेश की। बारिश,  लंबी दूरी की परवाह किए बिना बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के डोले के साथ चलते रहे। हर ओर एक ही स्वर सुनाई दे रहा था—“जय मां नंदा, जय मां सुनंदा।”

तल्लीताल पहुंचने के बाद डोला पुनः मल्लीताल की ओर लाया जाएगा और देर शाम ठंडी सड़क स्थित गोलू देवता मंदिर के समीप से मां नंदा-सुनंदा के डोले का नैनी झील में विसर्जन किया जाएगा।

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